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वर्तमान निदेशक

डा. जय गोपाल ( 19 जनवरी, 2012 से)

 

डा.जय गोपाल (25 अक्टूबर 2015), एक प्रतिष्ठित आलू प्रजनक है जिन्होने, केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान मे प्रधान वैज्ञनिक एवं फसल सुधार ‍विभाग के प्रमुख के रूप में कार्य किया। डा. जय गोपाल को कृषि अनुसंधान, विशेष रूप से आलू प्रजनन में उनके योगदान हेतु राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है। आपने पी.एच.डी की उपाधि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय , लुधियाना से प्राप्त की। इन्हें एमएस रंधावा पदक (1995), जवाहर लाल नेहरू पुरस्कार (1997), वसंत राव नाइक मेमोरियल सर्टिफिकेट (1998),  सी पी आर आई मेरिट अवार्ड (2004), और राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान अकेदमी के मान्यता पुरस्कार (2007-08) से सम्मानित किया गया है। आप पोटेटो रिसर्च नीदरलैंड के प्रोसेसिंग संपादक, प्लांट प्रोडक्सन सांइड के एसोसिएट संपादक, पोटेटो जनरल के इडिटर इन चीफ, तथा ग्लोबल सांइस बुक यू के व जपान के संपादक है। आप इनटरनेशनल पोटेटो सेटंर, लीमा, पेरू (2001-02) के विजिटिंग एसोसिएसन तथा होक्काइडो विश्वविद्यालय जापान, में 2003 और 2005-06 में विजिटिंग प्रोफेसर रहे। आपने, टास्क फोर्स सदस्य जी आय पी बी, (एफ ए ओ, रोम) और पैनल सदस्य, साइस काउंसिल (सी.जी.आइ..आर.एफ...) के रूप में अंतरराष्ट्रीय आलु संस्थान के लिए काम किया। आप राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी , इंडियन सोसायटी ऑफ जेनेटिक्स एवं प्लांट ब्रीडिंग, इंडियन पोटेटो एसोसिएसन, जापान सोसाइटी फार प्रामोसन आफ साइंड के सभासद हैं तथा थर्ड वल्ड एकेडमी के एसोसिएट भी हैं। आपके शोधपत्र प्रतिष्ठित राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। आपने आलू के एक दर्जन से अधिक किस्में, प्याज की छ: तथा लहसुन की एक किस्म का विकास किया। आपने राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलने की अध्याक्षता हेतु व्यापक यात्रा की। आपके नेतृत्व में प्याज लहसुन अनुसंधान निदेशालय ने चर्तुमुखी विकास किया।

 

 

पूर्व निदेशक

डॉ. किसन एकनाथ लवांडे (मई 1997 - अक्टूबर 2011) 

 

डा.के.इ लवांडे (21 दिसम्बार 1945) प्या..अनु.नि संस्थापक निदेशक थें। वह भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के एल्युमिनि है, और इन्होंने राहुरी के प्रसिध्द सब्जी प्रजनक के रूप में कार्य किया। इन्होने एक दशक से अधिक समय निदेशक के रूप मे कार्य करके प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थान के रूप मे स्थापित किया तथा ए आइ एन आर पी ओ जी के अर्न्तगत 12 मुख्य 15 स्वैच्छिक केन्द्रों को देश भर में स्थापित किया मूल्यवान उत्पादन और भंडारण प्रौद्योगिकियों का विकास करके  आपने प्याज और लहसुन के घरेलू बाजार के साथसाथ निर्यात बाजार के लिए कुल उत्पादकता बढ़ाने में मदद की। इन्होने राष्ट्रीय और अंतरार्ष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं में कई वैज्ञानिक पत्र प्रकाशित किए हैं और आप अनेक नीतिगत दस्तावेज के लेखक हैं ।

 

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