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जून 2017 के महीने की सलाह

. निकासी किए गए रबी प्याज एवं लहसुन के लिए

1.    निकासी किए गए प्याज के कंदों को भंडारण से पहले 10-12 दिनों के लिए छाया में सुखाना चाहिए।

2.    बिना कटे हुए एवं चोट के निशान से मुक्त, ठीक तरह से साफ किए गए प्याज के कंद भंडारण के लिए बेहतर होते हैं।

3.    प्याज को सतह एवं बाजू से हवादार भंडार गृह में भंडारित करना चाहिए। लगभग 4-5 फीट का ढ़ेर बनाकर कंदों को अच्छी तरह से फैलाकर रखना चाहिए।

4.    छाया में सुखाए हुए लहसुन कंदों को पत्तों के साथ हवादार भंडार गृह में लटकाकर अथवा ऊपर की ओर कम होते हुए गोलाकार ढेर बनाकर भंडारित करना चाहिए।

5.    भंडारित कंदों की नियमित रूप से निगरानी की जानी चाहिए। यदि सड़े या संक्रमित कंद दिखाई दे तो उन्हें तुरंत हटा देना चाहिए। सुनिश्चित करें कि भंडार गृह में हवा का आवागमन उचित है।

 . खरीफ प्याज की पौधशाला के लिए खेत की तैयारी

खरीफ प्याज के लिए खास कर जून के दूसरे या चौथे सप्ताह में पौधशाला में बीज बोने की  सलाह दी जाती है। पौधशाला तैयार करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

1.    एक हेक्टेयर में रोपाई के लिए पौध प्राप्त करने हेतु लगभग 5-7 कि.ग्रा. बीज को 0.05 हेक्टेयर में बो कर पौधशाला तैयार करने की आवश्यकता होती है।

2.    गहरी जुताई की सिफारिश की गई है, जिससे कि कीट के कोश व खरपतवार के बीज सूर्य के प्रकाश से नष्ट हो जाएं।

3.    क्यारियां तैयार करने से पहले पिछले फसल के बचे हुए अवशेष, खरपतवार और पत्थर हटा देने चाहिए।

4.    अच्छी तरह से सड़ी हुई आधा टन गोबर की खाद 0.05 हेक्टेयर में ड़ालें।

5.    पौधशाला के लिए 10-15 सें.मी. ऊंचाई, 1 मी. चौड़ाई और सुविधा के अनुसार लंबाई की उठी हुई क्यारियां तैयार की जानी चाहिए।

6.    पौधशाला में खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के तुरंत बाद 0.2% पेंडीमिथालिन के इस्तेमाल की सिफारिश की गई है। यह खरपतवारों को उगने से पूर्व नष्ट कर देता है।

7.    बुवाई से पहले बीज का उपचार कार्बेन्डाज़िम 1-2 ग्रा./कि.ग्रा बीज की दर से करें। यह मृदा जनित रोगों से बचने में सहायता करता है।  

8.    आर्द्र गलन से बचने एवं स्वस्थ पौध प्राप्त करने के लिए ट्रायकोडरमा विरीडी का उपयोग करने की भी सिफारिश की गई है।

9.    बीज 50 मि.मी. से 75 मि.मी. के अंतर पर कतार में बोया जाना चाहिए। बुवाई के बाद बीज को महीन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट से ढका जाना चाहिए और फिर हल्के पानी का छिड़काव करना चाहिए। टपक एवं फव्वारा सिंचाई की सिफारिश की गई है।

 

. अगेती खरीफ प्याज के लिए खेत की तैयारी

1.    खेत में हल से जुताई करनी चाहिए ताकि पिछली फसल के बचे अवशेष एवं पत्थर हट जाए और ढेले टूटकर मिट्टी भूरभूरी हो जाए।

2.    सड़ी हुई गोबर खाद 15 ./हे. या मुर्गी खाद 7.5 ./हे. या केंचूर की खाद 7.5 ./हे. आखिरी जुताई के समय डालनी चाहिए।

3.    जहां पर पानी जमाव की समस्या है, वहां सपाट क्यारियां नहीं बनानी चाहिए। चौड़ी उठी हुई क्यारियां जिनकी ऊंचाई 15 सें.मी. और चौड़ाई 120 सें.मी. हो और नाली 45 सें.मी. हो, तैयार करनी चाहिए। नाली से अतिरिक्त जल बाहर निकाला जा सकता है जिससे काला धब्बा ¼ऐन्थ्राक्नोज½ रोग के प्रकोप को कम करने में मदद होगी। यह तकनीक टपक और फव्वारा सिंचाई के लिए उपयुक्त है।

4.    टपक सिंचाई के लिए हर चौड़ी उठी हुई क्यारी में 60 सें.मी. की दूरी पर दो टपक लेटरल नालियां (16 मि.मी. आकार) अंतर्निहित उत्सर्जकों के साथ होनी चाहिए। दो अंतर्निहित उत्सर्जको के बीच की दूरी 30-50 सें.मी. और प्रवाह की दर 4 ली./ घंटा होनी चाहिए।

5.    फव्वारा सिंचाई के लिए दो लेटरल ¼20 मि.मीके बीच की दूरी 6 मी. और निर्वहन दर 135 ली./घंटा होनी चाहिए।

 

. अगेती खरीफ प्याज की रोपाई के लिए

1.    कम और अधिक आयु की पौध रोपाई के लिए नहीं लेनी चाहिए। खरीफ प्याज के लिए 35-40 दिन पुराने पौध की रोपाई करने की सिफारिश की गई है।

2.    फफूंदी रोगों एवं थ्रिप्स के प्रकोप को रोपाई के बाद 30-40 दिन तक कम करने के लिए पौध की जड़ों को 0.1% कार्बेन्डाज़िम एवं 0.025% कार्बोसल्फान के घोल में दो घंटे डूबोने के बाद रोपित किया जाना चाहिए।

3.    पौध अच्छी तरह से स्थापित हो सके इसलिए रोपाई के समय पौध के शीर्ष का एक तिहाई हिस्सा काट देना चाहिए।

4.    नत्रजन : फॉस्फोरस : पोटाश उर्वरकों की आधारीय रूप में क्रमश: 25 कि.ग्रा. : 40 कि.ग्रा. : 40 कि.ग्रा. रोपाई के समय देना चाहिए। नत्रजन एवं फॉस्फोरस की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए एजोस्पाइरिलियम एवं फॉस्फोरस घोलनेवाले जीवाणु 5 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर की दर से मिट्टी में डालने की सिफारिश की गई है।

5.    गंधक को रोपाई के समय आधारीय रूप में डाला जाना चाहिए। अगर पहले से गंधक स्तर 25 कि.ग्रा. / हे. से उपर है, तब 30 कि.ग्रा. /हे. और यदि यह 25 कि.ग्रा. / हे. से नीचे है, तब 45 कि.ग्रा. / हे. गंधक का इस्तेमाल करें। मिट्टी परिक्षण करने की सलाह दी जाती है।

6.    खरपतवार नाशक ऑक्सिफ्लोरफेन 23.5% ईसी (1.5-2 मि.लि./ली) या पेंडीमिथालीन 30% ईसी (3.5-4 मि.लि./ली) का इस्तेमाल रोपाई के समय करना चाहिए। इससे रोपाई के 40 दिन बाद तक खरपतवार प्रबंधन होता है।

7.   पौध की रोपाई पंक्तियों के बीच 15 से.मी. और पौधों के बीच 10 से.मी. अंतर रखकर करने की सिफारिश की गई है।

8.    रोपाई के समय तथा रोपाई के तीन दिन बाद सिंचाई करें ताकि पौध अच्छी तरह से स्थापित हो सके। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई की जानी चाहिए।

 

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