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ICAR - Directorate of Onion and Garlic Research

प्याज एवं लहसुन विश्व भर में व्यंजनो को स्वादिष्ट बनाने के लिए प्रसिद्ध हैं l भोजन में प्रयोग होने के साथ साथ इनमें बहुमूल्य औषधीय गुण भी हैं। इसके साथसाथ लहसुन में कवकनाशी तथा कीटनाशी गुण भी विघमान हैं। निर्जलित प्याज एवं लहसुन से तैयार सूखा चूर्ण तथा पेस्ट, कृषि औदयोगिकी स्थापित करने का आधार बन सकते हैं।

देश में प्याज एवं लहसुन की महत्व को समझते हुए भा.कृ.अनु..ने 1994 मे आठवीं योजना के अर्न्तगत राष्ट्रीय प्याज एवं लहसुन अनुसंधान केन्द्र की स्थापना नासिक में की l विभिन्न परिस्थितियो के कारण केंद्र को 16 जून 1998 को राजगुरूनगर में स्थानांतरित कर दिया गया l समय बीतने के साथ प्रयोगशालाओं तथा प्रायोगिक खेतों को विभिन्न सुविधाओं से सुसज्जित किया गया l तत्पश्चात दिसम्बर २००८ में संस्थान को प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय के रूप में उन्नत कर दिया गया l देश के विभिन्न २५ संस्थानों के साथ, प्याज एव लहसुन की अखिल भारतीय नेटवर्क परियोजना की स्थापना भी की गयी।

                          ताज़ा खबर

भाकृअनुप-प्यालअनुनि ने मनाया स्थापना दिवस

भाकृअनुप-प्याज एवं लहसुन अनुसन्धान निदेशालय, राजगुरुनगर ने अपना 20 वां स्थापना दिवस 16 जून 2017 को मनाया। भाकृअनुप-प्यालअनुनि के वर्तमान एवं पूर्व कर्मचारियों के अलावा, इस कार्यक्रम में भाकृअनुप-प्यालअनुनि द्वारा 'मेरा गांव मेरा गौरव योजना' के तहत अपनाएं गांवों के 40 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।  डॉ. के. ई. लवांडे, भूतपूर्व निदेशक, भाकृअनुप-प्यालअनुनि एवं भूतपूर्व कुलपति, बीएसकेकेवी, दापोली इस अवसर पर मुख्य अतिथि तथा डॉ. एस. डी. सावंत, निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय अंगूर अनुसन्धान केंद्र, पुणे, डॉ. के. वी. प्रसाद, भाकृअनुप-पुष्प अनुसन्धान निदेशालय, पुणे और डॉ. लाखन सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, पुणे सम्माननीय अतिथि थे। डॉ. विजय महाजन, प्रभारी निदेशक, भाकृअनुप-प्यालअनुनि ने अतिथियों का स्वागत किया और भाकृअनुप-प्यालअनुनि की उपलब्धियों को संक्षेप में बताया। मुख्य और सम्माननीय अतिथियों ने भाकृअनुप-प्यालअनुनि में किए जा रहे कार्यों की सराहना की तथा कर्मचारियों को बधाई दी। प्याज एवं लहसुन की उन्नत खेती करनेवाले पांच प्रगतिशील किसानों को इस अवसर पर सम्मानित किया गया। भाकृअनुप-प्यालअनुनि द्वारा प्रकाशित प्रसार पत्रिका 'कांदा साठवण' का विमोचन भी इस अवसर पर किया गया। किसानों के लाभ के लिए डॉ. एस. एस. गाडगे, वरिष्ठ वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) द्वारा प्याज एवं लहसुन खेती की उन्नत प्रौद्योगिकियों पर व्याख्यान दिया गया। उन्हें निदेशालय में हो रही प्याज एवं लहसुन की गतिविधियां भी दिखाई गई। डॉ. गाडगे ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद व्यक्त किया।

 

 

 

भा.कृ.अनु.. - डी..जी.आर ने विश्व मृदा दिवस मनाया

भा.कृ.अनु.. - डी..जी.आर  ने 5 दिसम्बर 2016 कोविश्व मृदा दिवसमनाया।  डा. विजय महाजन, निदेशक, भा.कृ.अनु.. - डी..जी.आर  ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया तथा मिट्टी की जांच एवं मृदा स्वास्थ कार्ड के महत्त्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि फसलों के अधिक उत्पादन हेतु मिट्टी की जांच कराकर उचित मात्रा मे ही उर्वरकों का प्रयोग करें। डॉ. एस. एस. गाडगे, ने किसानो को प्याज एवं लहसुन की उत्पादकता बढाने हेतु विभिन्न प्राद्योगिकियों के बारे में बताया। डॉ. . थंगासामी, वैज्ञानिक, भा.कृ.अनु.. - डी..जी.आर ने मृदा स्वास्थ तथा फसल उत्पादन हेतु उचित मात्रा में उर्वरक के प्रयोग विषय पर व्याख्यान दिया। समारोह के मुख्य अतिथि श्री बापूसाहेब थिगले, नगर परिषद अध्यक्ष, राजगुरूनगर ने मृदा स्वास्थ के महत्त्व के बारे में चर्चा की तथा कहा कि मृदा जाच पश्चात ही उचित मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग हेतु किसानों में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है.  65 किसानों ने समारोह में भाग लिया जिसमें महिलाये भी शामिल थी। मुख्य अतिथि द्वारा किसानों को मृदा स्वास्थ कार्ड बाटे गये। समारोह धन्यवाद ज्ञापन के साथ समाप्त हुआ।

 

 

 

भा.कृ.अनु.प. -डी.ओ.जी.आर ने कृषि शिक्षा दिवस मनाया
     छात्रों में कृषि तथा कृषि से संबंधित विषयों के प्रति जागरूकता लाने हेतु महात्मा गांधी उच्चतर विद्यालय एवं कनिष्ठ महाविद्यालय राजगुरुनगर में, भा.कृ.अनु.प.-डी.ओ.जी.आर, पुणे ने कृषि शिक्षा दिवस ०३ दिसंबर, २०१६ को मनाया । इस दिवस पर महात्मा गांधी उच्चतर विद्यालय एवं कनिष्ठ महाविद्यालय के कक्षा १० तथा ११ के पचास से अधिक छात्र एवं अध्यापक तथा प्रबंधन अधिकारियों ने भाग लिया । डॉ. विजय महाजन, निदेशक भा.कृ.अनु.प.-डी.ओ.जी.आर, ने अपने स्वागत उद्बोधन में छात्रों को शिक्षा दिवस के महत्त्व के बारे में अवगत कराया । उन्होंने कृषि विज्ञान क्षेत्र में शोध, शिक्षा तथा विस्तार के महत्त्व को बताया तथा छात्रों को कृषि के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का अपनाने हेतु प्रेरित किया । उन्होंने छात्रों के उत्साहपूर्वक कृषि शिक्षा दिवस में भाग लेने पर ख़ुशी जतायी । डॉ. एस. एस. गाडगे, वरिष्ठ वैज्ञानिक, भा.कृ.अनु.प.-डी.ओ.जी.आर,  ने कृषि के महत्त्व, भा.कृ.अनु.प. के संरचनात्मक व्यवस्था, तथा इसके शोध, शिक्षा और विकास में इसकी उपयोगिता हेतु छात्रों को अवगत कराया । डॉ. एस. अनंधन, वरिष्ठ वैज्ञानिक, भा.कृ.अनु.प.-डी.ओ.जी.आर, ने प्रेरणादायी वक्तव्य तथा प्रष्नमंजुषा प्रतियोगिता का आयोजन किया  तत्पश्चात प्रतियोगिता में सफल छात्रों को पुरस्कार वितरित किया गया । श्री. एस. एस. जादव, प्रधानाचार्य ने भा.कृ.अनु.प.-डी.ओ.जी.आर, के द्वारा वर्तमान में कृषि शिक्षा दिवस के माध्यम से देश में कृषि शिक्षा प्रणाली पर दिये जा रहे ज्ञान की प्रशंसा की तथा छात्रों के भविष्य विशेष रूप से कृषि के क्षेत्र में, प्रोत्साहन हेतु यह कार्यक्रम आयोजित कर परिषद ने सराहनीय कार्य किया ।  

 

खैरेवाड़ी गांव में किसान संगोष्ठी का आयोजन

प्याज  में एकीकृत कीट प्रबंधन को  बढ़ावा देने हेतु दिनांक 30-11-2016 को पुणे जिले के खैरेवाड़ी गांव में किसान संगोष्ठी का आयोजन कंद  (प्याज) के लिये अनुकूलनीय आईपीएम प्रौद्योगिकी का निरूपण, सत्यापन एवं संवर्धन परियोजना के तहत आईसीएआर- एनसीआईपीएम्, नई दिल्ली के सहयोग से आईसीएआर- डिओजीआर द्वारा आयोजित किया गया। खैरेवाड़ी गांव की महिलाओं सहित पचास प्याज उत्पादकों, स्थानीय एनजीओ (हरिता) के प्रतिनिधियों ने संगोष्ठी  में भाग लिया। इस बैठक के दौरान डॉ. वी. महाजन (निदेशक, आईसीएआर- डिओजीआर) के द्वारा प्याज के एकीकृत कीट प्रबंधन के महत्व, लाभ,  दृष्टिकोण तथा उपलब्ध प्रौद्योगिकी के बारे में जानकारी दी। डॉ. एच. आर. सरदाना, प्रधान वैज्ञानिक (आईसीएआर- एनसीआईपीएम्) के द्वारा प्याज कीटों के प्रबंधन के लिए पर्यावरण को अनुकूल कम जोखिम वाले कीटनाशकों के ईटीएल आधारित उपयोग के बारे में सविस्तार जानकारी दी। डॉ एस. जे. गवांडे, वरिष्ठ वैज्ञानिक (आईसीएआर- डिओजीआर) ने प्याज के रोगों को विस्तार में समझाया और प्याज कीट और रोग के लिए डिओजीआर द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों के बारे में जानकारी दी। डॉ. नारायण भट्ट, प्रधान वैज्ञानिक (आईसीएआर- एनसीआईपीएम्) और डॉ. वी. करुपैयाह, वैज्ञानिक (आईसीएआर- डिओजीआर) ने भी बैठक के दौरान किसानों के साथ चर्चा की।

 

भाकृअनुप- प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय  ने मनाया संविधान दिवस

भाकृअनुप- प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय में 26 नवम्बर 2016 को संविधान दिवस मनाया गया। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री सुनिल कुमार ने संविधान की प्रस्तावना से सभी कर्मचारीयों को अवगत किया और निदेशालय के प्रभारी निदेशक डॉ. विजय महाजन ने संविधान दिवस के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किये।

 

भाकृअनुप - प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय ने मनाया सांप्रदायिक सदभावना सप्ताह

भा.कृ.अनु.. प्या..अनु.नि. में दिनांक 19 से 25 नवम्बर, 2016 के दौरान साम्प्रदायिक सदभावना सप्ताह मनाया गया। 25 नवम्बर, 2016  झेंडा दिवस के रूप में मनाया गया। निदेशालय के समस्त आधिकारियों, कर्मचारियों ने भाग लेकर अपना योगदान दिया। संस्थान के प्रभारी  निदेशक डॉ विजय महाजन ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया एवं सम्बोधित  करते हुए  एक जुट होकर देश की सेवा करने हेतु देश मे साप्रदायिक सदभावना बनाए रखने हेतु सभी को प्रेरित किया।

 

 

 

 

डा.‍त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेअर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप द्वारा डीओजीआर का भ्रमण

डा.‍त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेअर एवं महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने दिनांक 21-22 अक्तूबर, 2016 को प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय का भ्रमण किया ।  उन्होंने संचालित गतिविधियों का मूल्यांकन किया ।  महोदय ने निदेशालय के सभी वैज्ञानिकों तथा कर्मचारियों के साथ चर्चा की तथा डॉ. जय गोपाल, निदेशक, प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय को उनकी सेवानिवृति जो दि. 31 अक्तूबर, 2016 को है, पर सन्मानित किया ।  उन्होंने अपने उदबोधन में निदेशालय में किए जा रहे कार्य तथा हासिल उपलबद्धियों की सराहना की एवं इनमें और सुधार के लिए बहुमूल्य सुझाव दिए । निदेशालय के सभी कर्मचारियों ने महानिदेशक के आगमन और उनके बहुमूल्य समय एवं मार्गदर्शन के लिए उनका तहेदिल से धन्यवाद किया ।  

 

आईसीएआर-डीओजीआर का लोगो व्यापार चिन्ह के रूप में प्रचलित

आईसीएआर-डीओजीआर का लोगो व्यापार चिन्ह के रूप में पंजीकृत किया गया है लोगोप्याज एवं लहसुनको दर्शाता है। लाल रंग की बडी पत्तीप्याजका प्रतिनिधित्व करता है, और छोटी पत्तीलहसुनका प्रतिनिधित्व करती है। नीचे का चाप पृथ्वी को तथा चाप का हरा रंग कृषि को इंगित करता है। हरे रंग की पृष्टभूमि पर हिन्दी में लिखा प्या..अनु.नि हिंदी मेंप्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालयका प्रतिनिधित्व करता है निचे प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय को अंग्रेजी में संक्षिप्त से डीओजीआर लिखा गया है। पंजीकरण के बाद, अब आईसीएआर-डीओजीआर को इस लोगो का उपयोग करने का विशेष अधिकार है

डीओजीआर ने मनाया अन्‍तर्राष्‍ट्रीय योग दिवस

भाकृअनुप - प्‍याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय (डीओजीआर), राजगुरुनगर में अन्‍तर्राष्‍ट्रीय योग दिवस 21 जून 2016 को आयोजित किया गया जिसमें सभी कर्मचारियों ने भाग लिया !  श्री यशवंत बोबले एवं श्री रामदास तांबे, योग मार्गदर्शक, पतंजली योग पीठ द्वारा योग के सम्‍बंध में उद्बोधन दिया ! इसके पहले सभी सन्‍माननीय अतिथियों का स्‍वागत किया गया तथा निदेशक महोदय ने योग के महत्‍व को अधोरेखित किया ! इस अवसर पर आदरणीय प्रधानमंत्री के संदेश को श्री राम बोंबले, नोडल अधिकारी ने सभी को पढ़कर सुनाया !  योग का अभ्‍यास तथा विभिन्‍न प्रकार के आसन लगभग 45 मिनट तक सभी कर्मचारियों ने योग मार्गदर्शकों की निगरानी में किए !  कार्यक्रम का समापन धन्‍यवाद प्रस्‍ताव के साथ हुआ !

 

डीओजीआर ने मनाया स्‍थापना दिवस

भाकृअनुप - प्‍याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय (डीओजीआर), राजगुरुनगर का 19 वां स्‍थापना दिवस 16 जून 2016 को मनाया गया !  डीओजीआर के वर्तमान एवं पूर्व कर्मचारियों के अलावा, इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्‍न राज्‍यों से आए 55 किसानों ने भाग लिया !  डॉ. टी.ए. मोरे, पूर्व कुलपति, एमपीकेवी, राहुरी इस अवसर पर मुख्‍य अतिथि थे ! डॉ. पी.जी. अडसुले, पूर्व निदेशक, एनआरसीजी, पुणे, डॉ. पी.एस. नाईक. पूर्व निदेशक, आईआईवीआर, वाराणसी, एवं डॉ. एस.के. शर्मा, अध्‍यक्ष, आईएआरआई आरएस, पुणे सम्‍माननीय अतिथि थे !  अखिल भारतीय प्‍याज एवं लहसुन नेटवर्क अनुसंधान परियोजना के सात केन्‍द्रों के प्रधान अन्‍वेषक तथा उनके प्रतिनिधी भी इस अवसर पर उपस्थित थे !  डॉ. जय गोपाल, निदेशक, भाकृअनुप-डीओजीआर ने अतिथियों का स्‍वागत किया और सारांश में डीओजीआर की उपलब्धियों और इससे कृषक समुदाय को हुए लाभ की जानकारी दी!  इस अवसर पर मुख्‍य और सम्‍माननीय अतिथियोंने डीओजीआर में किए जा रहे कार्यों की सराहना की तथा कर्मचारियों को बधाई दी ! भारत के विभिन्‍न भागों से आए प्‍याज एवं लहसुन के दस प्रगतिशील किसानों को प्‍याज एवं लहसुन की खेती में उनके योगदान के लिए इस अवसर पर सम्‍मानित किया गया ! किसानों द्वारा लाए गए प्‍याज एवं लहसुन के नमूने भी प्रदर्शित किए गए !  डीओजाआर के नए भवन में हाल ही में बनाई गई ढॉंचागत सुविधाऐं अर्थात प्रदर्शनी एवं संचार केन्‍द्र, पुस्‍तकालय, एकेएमयू एवं सम्‍मेलन कक्ष का मुख्‍य अतिथि और सम्‍माननीय अतिथियों द्वारा उद्घाटन किया गया !  किसानों के लाभ के लिए प्‍याज एवं लहसुन की उन्‍नत खेती पर एक व्‍याख्‍यान दिया गया ! उन्‍हें डीओजीआर में हो रही प्‍याज एवं लहसुन की गतिविधियॉं दिखाई गई ! कार्यक्रम धन्‍यवाद प्रस्‍ताव एवं राष्‍ट्रीय गान के साथ समाप्‍त हुआ !

नंदुरबार में टीएसपी योजना के तहत प्रशिक्षण का आयोजन

प्याज और लहसुन के सुरक्षित भण्डारण हेतु कम लागत वाला भण्डार गृह के निर्माण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 19 से 20 मई, 2016 तक कृषि विज्ञान केन्द्र के सहयोग से टीएसपी योजना के तहत नंदुरबार के आदिवासी क्षेत्र में साईकृपा शेतकारी गट, श्रावणी; और प्रगति शेतकारी पुरुष गट, पल्सुन के प्रक्षेत्र पर आयोजित किया गया । विभिन्न स्थानों से कुल 145 किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया । किसानों को कम लागत वाला प्याज भण्डारण गृह जो डीओजीआर द्वारा विकसित किया गया  है, बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया गया । डॉ.  अमर जीत गुप्ता, वरिष्ट वैज्ञानिक (उद्यान) एवं नोडल अधिकारी (टीएसपी); डॉ.  ए. आर. वखरे, तकनिकी अधिकारी और श्री आर.एम. पाटिल, एसएमएस (उद्यान) ने प्रशिक्षण दिया । लगभग सभी प्रदर्शनीयों के परिणाम सराहनीय रहे । मेरालीयाहा बचत गट, पालीपाडा के प्रक्षेत्र पर प्याज के प्रजाति भीमा किरण का कंद उत्पादन 200 क्विन्टल प्रति एकड़  पाया गया । किसनों को 80,000/- रुपये प्रति एकड़ से ज्यादा का सकल आय प्याज को 6/- रुपये प्रति किलोग्राम के दर पर बेचने पर भी मिला ।

भीमा लाइट रेड - प्याज की नई किस्म अनुमोदित

प्याज की डीओजीआर-571-एलआरकिस्म आईसीएआर-डीओजीआर द्वारा विकसित की गई है जिसे अखिल भारतीय प्याज एवं लहसुन अनुसंधान नेटवर्क परियोना की वार्षिक समूह बैठक जो कानपुर (उ.प्र.) में 4-5 अप्रैल 2016 को संपन्न हुई में अनुमोदित किया गया। इस किस्म का नाम भीमा लाइट रेड रखा गया है। यह किस्म कर्नाटक और तमिलनाडु में रबी मौसम के लिए अनुमोदित की गयी है। इस किस्म की परिपक्वता मध्यम है (115 दिन रोपाई बाद) तथा इसके कंद हल्के लाल रंग के तथा आकार गोल एवं कंद का वजन लगभग 70 ग्राम होता है। इस किस्म की गर्दन पतली होती है और कुल घुलनशील ठोस पदार्थ की मात्रा 13% है। सिफारिश क्षेत्र में बहुस्थानीय परीक्षणों में इसकी औसत उपज 385 क्विंटल/ हेक्टेयर है। भंडारण के चार महीनों बाद भी कुल वजन नुकसान 25% से कम है। यह किस्म तोर एवं जोड वाले कंद से मुक्त है।

नंदुरबार में टीएसपी योजना के तहत प्रशिक्षण का आयोजन

प्याज और लहसुन के वाणिज्यिक खेती पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 8 से 10 मार्च, 2016 तक कृषि विज्ञान केन्द्र के सहयोग से टीएसपी योजना के तहत नंदुरबार के आदिवासी क्षेत्र में आयोजित किया गया । यह प्रशिक्षण शिवशक्ति शेतकारी गट, श्रावणी; जय बालाजी शेतकारी गट, कर्वे; और मेरालीयाहा बचत गट, पालीपाडा के प्रक्षेत्र पर एक- एक दिन के लिए किया गया । डॉ.  अमर जीत गुप्ता, वरिष्ट वैज्ञानिक (उद्यान) एवं नोडल अधिकारी (टीएसपी योजना); डॉ.  एस. एस.  गाडगे, वरिष्ट वैज्ञानिक (विस्तार); श्री राजेन्द्र दहतोंडे, प्रभारी, कृषि विज्ञान केन्द्र, नंदुरबार; और श्री आर.एम. पाटिल, एसएमएस (उद्यान) ने प्रशिक्षण दिया । विभिन्न स्थानों से कुल 160 किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया । किसानों द्वारा डीओजीर की प्रौद्योगिकी को अपनाने और वाणिज्यिक फसल के रूप में प्याज और लहसुन की खेती करने पर जोर दिया गया । प्याज के भीमा किरण के कंद उत्पादन पर 10 प्रदर्शनी, लहसुन के भीमा परपल के कंद उत्पादन पर 4 प्रदर्शनी और प्याज के भीमा किरण एंव भीमा सुपर के बीजोत्पादन पर 10 प्रदर्शनी किसानों के प्रक्षेत्र पर लगायी गयी हैं । डीओजीर के सिफारिश के अनुसार सभी प्रदर्शन परीक्षणों मे ड्रिप सिंचाई सुविधा प्रदान की गयी है ।

FIVE ONION AND ONE GARLIC VARIETIES NOTIFIED

Five varieties of onion & one variety of garlic of ICAR-DOGR have been notified vide Gazette Notification No. S.O.2277(E) (dated 20.8.2015) on the recommendation of Central Sub-Committee on Crop Standards, Notification and Release of Varieties for Horticultural Crops.

Name

Notified for

Salient features

 

Onion

     

Bhima Kiran

Rabi season: Andhra Pradesh, Bihar, Delhi, Haryana, Karnataka, Maharashtra, Punjab and Uttar Pradesh

Light red bulbs, maturity 125-135 days, average yield 28-32 t/ha, potential yield 45 t/ha, storability 5-6 months.

Bhima Red

Kharif season: Delhi, Gujarat, Haryana, Karnataka, Maharashtra, Punjab, Rajasthan and Tamil Nadu

Rabi season: Madhya Pradesh and Maharashtra

Red bulbs, maturity 105-110 days in kharif and 110-120 days in rabi, average yield 26-28 t/ha in kharif and 30-32 t/ha in rabi with potential yield up to 40 t/ha, storability 30-45 days in kharif and 90 days in rabi.

Bhima Dark Red

Kharif season: Chhattisgarh, Delhi, Gujarat, Haryana, Jammu, Karnataka, Madhya Pradesh, Maharashtra, Odisha, Punjab, Rajasthan and Tamil Nadu

Dark red bulbs, maturity 100-110 days in kharif, average yield 22-24 t/ha, potential yield 32 t/ha, storability 2 months in kharif.

Bhima Shubhra

Kharif season: Chhattisgarh, Gujarat, Karnataka, Madhya Pradesh, Maharashtra, Odisha, Rajasthan and Tamil Nadu

First white onion variety for kharif season, maturity 110-115 DAT, average yield 18-20 t/ha, potential yield 29 t/ha. Suitable for late kharif also with average yield 36-42 t/ha, potential yield 56 t/ha, storability 30 to 45 days in kharif

Bhima Shweta

Kharif season: Chhattisgarh, Gujarat, Karnataka, Madhya Pradesh, Maharashtra, Odisha, Rajasthan and Tamil Nadu

Rabi season: Andhra Pradesh, Bihar, Delhi, Haryana, Karnataka, Maharashtra, Punjab and Uttar Pradesh

White bulbs, maturity 110-120 days, average yield 18-20 t/ha in kharif and 26-30 t/ha in rabi, potential yield 40 t/ha, storability 3 months in rabi.

Garlic

     

Bhima Omkar

Rabi season: Haryana, Rajasthan, Gujarat and Delhi

White bulbs, maturity 120-135 days, average yield 10-12 t/ha, potential yield 14 t/ha, storability 6-8 months

Organized Field Day in Tribal belts of Nandurbar under TSP

ICAR-DOGR organized a field day training on cultivation of onion and garlic on 14th December, 2015 at Deomogra Shetkari Bachat Gat, Sonpada, Nandurbar. About 75 farmers participated in this programme from different parts of Nandurbar. Dr. A. J. Gupta, Sr. Scientist and Nodal Officer (TSP) organized the programme and briefed about activities conducted under TSP and benefit gained by tribal farmers. He delivered lecture on cultivation of onion and garlic and emphasized farmers regarding adoption of advanced production technology for commercial crop. Mr. R. M. Patil spoke about impact of TSP which resulted in increase of onion and garlic cultivation in the tribal belt of Nandurbar. Mr. H.S. Gawali was associated in organizing programme. Twenty-four demonstrations were laid out as per DOGR recommendations at the fields of 200 selected tribal farmers which includes 10 demonstrations on onion seed production of Bhima Super and Bhima Kiran, 10 demonstrations on bulb production of Bhima Kiran and 4 demonstrations on garlic bulbs production of Bhima Purple during rabi 2015-16.

 
 

भाकृअनुप-प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय द्वारा विश्व मृदा दिवस समारोह


भाकृअनुप - प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय द्वारा दिनांक 5 दिसम्बर, 2015 को विश्व मृदा दिवस मनाया गया। इस अवसर पर मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम के तहत चयनित 250 किसानों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार किए गए, जिनका वितरण किसानों को कृषि विज्ञान केन्द्र, नारायणगांव में आयोजित कार्यक्रम में किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्रीमोहनभाई के. कुंडरिया ने की। इस कार्यक्रम में शिरूर के माननीय सांसद श्रीशिवाजीराव आढळराव पाटील; विधानसभा सदस्य श्रीपाशा पटेल; महाराष्ट्र  सरकार के कृषि आयुक्त श्रीविकास देमुख; एमपीकेवी, राहुरी के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. के.डी. कोकाटे; एवं भाकृअनुप-प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय के निदेशक डॉ. जय गोपाल भी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें भाकृअनुप-प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को दर्शाया गया। भाकृअनुप-प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को प्याज व लहसुन की खेती प्रारंभ करने से पूर्व अपने खेत की मिट्टी की जांच कराने की सलाह दी। खेतों से मिट्टी के नमूनों को संकलित करने की तकनीक भी प्रद‍र्शित की गई।

 

 

 

खेलकूद प्रतियोगिता

भाकृअनुप-प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय, राजगुरूनगर, पुणे ने दिनांक 2 से 6 नवम्बर, 2015 को भाकृअनुप-केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर, राजस्थान में आयोजित भाकृअनुप पश्चिम जोन खेलकूद प्रतियोगिता-2015 में भाग लिया। भाकृअनुप-प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय की टीम ने 100 मीटर, 200 मीटर, 1500 मीटर दौड़, लंबी कूद एवं ऊंची कूंद, रिले दौड़, बैडमिंटन और कैरम प्रतियोगिता में भाग लिया। श्री मंजूनाथ गौड़ा, डी.सी., वैज्ञानिक, भाकृअनुप-प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय ने 200 मीटर दौड़ तथा ऊंची कूद में स्वर्ण पदक, 100 मीटर दौड़ में रजत पदक और लंबी कूद में कांस्य पदक जीता। भाकृअनुप-प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय दो वर्शों तक लगातार श्रेष्ठ प्रदर्षन करने पर उन्हें बधाई देता है।


सतर्कता जागरूकता सप्‍ताह

 

केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग, भारत सरकार, नई दिल्‍ली और भा. कृ. अनु. परिषद के आदेशानुसार इस वर्ष भी सतर्कता जागरूकता सप्‍ताह दिनांक 26 अक्‍टूबर 2015 से 31 अक्‍टूबर 2015 तक मनाया गया ।  इस वर्ष सतर्कता सप्‍ताह का विषय था सर्तकता से रोकथाम नतीजा है सुशासन  सतर्कता सप्‍ताह के दौरान दिनांक  26 अक्‍टूबर 2015 को निदेशालय के समस्‍त कार्मिको ने प्रात: 11 बजे सभा कक्ष में लोक सेवा, सत्‍यनिष्‍ठा, ईमानदारी, पारदर्शिता एवं अपने संस्‍थान को भ्रष्‍टाचर रहित बनाए  रखने के लिए प्रतिज्ञा ली ।  जिसके प्रचार प्रसार के लिए निदेशालय के मुख्‍य प्रवेश द्वार पर बैनर एवं सूचनापट्ट पर परिपत्रो द्वारा जागरूकता लाने का प्रयास किया गया ।  

      सतर्कता सप्‍ताह के दौरान चर्चा सत्र  दिनांक 29 अक्‍टूबर 2015 को अपरान्‍ह 3.30 बजे रखा गया । जिसमें निदेशालय के सतर्कता अधिकारी एवं संस्‍थान के प्रभारी निदेशक डॉ. विजय महाजन, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री सुनिलकुमार ने अपने विचार व्‍यक्‍त किये, जिसमें विशेष रूप से समस्‍त कार्मिको से आवहान किया कि सतर्कता सप्‍ताह को केवल औपचारिकता मात्र न माना जाएं बल्कि अपने वास्‍तविक जीवन में आत्‍म सात किया जाना चाहिए एवं सार्वजनिक खरीद में नियमों का पूर्णत: पालन किया जाना चाहिए जिससे हमारे द्वारा किये गये कार्यो की पारदर्शिता झलकती रहे । निदेशक महोदय ने साथ में यह भी बताया की नि :स्वार्थ से देश व  समाजहित के लिए हम ईमानदारी से अपना कार्य करेंगे तो हम हर समय जागरूक रहेंगे एवं भ्रष्टाचार रहित कार्य करने में सफल होंगे | इन विचारो के साथ ही सतर्कता जागरूकता सप्‍ताह का समापन सम्‍पन्‍न ३१.१०.२०१५ को किया गया ।

 

“दि ओनियन” – पुस्तक का विमोचन 


डॉ. एन.के. कृष्ण कुमार, डा. जय गोपाल तथा डॉ. वी.ए. पार्थसारथी द्वारा सम्पादित पुस्तक दि ओनियन’’ का विमोचन माननीय केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्रीराधा मोहन सिंह ने दिनांक 22 सितम्बर, 2015 को कृषि एवं सहकारिता विभाग एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिष की इंटरफेस बैठक में किया। इसका प्रकाश भारतीय कृषि अनुसंधान परिष, नई दिल्ली द्वारा किया गया है। इस पुस्तक में कुल 18 अध्याय हैं जिन्हें प्याज अनुसंधान एवं विकास के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शमिल करते हुए प्याज के संबंधित क्षेत्रों के विषेशज्ञों द्वारा लिखा गया है। आशा है कि यह पुस्तक छात्रों तथा अनुसंधान कर्मियों के लिए जानकारी का भरपूर स्रोत होगी और यह किसानों तथा उद्यमियों के लिए भी ज्ञानवर्धक होगी। 

A new white onion variety 'Bhima Safed' for Kharif

In the recently held Annual Group Meeting of All India Network Research Project on Onion & Garlic at Davengere, Karnataka on 6-7th February, 2015, white onion line developed by the Directorate of Onion & Garlic Research, Rajgurunagar has been recommended for release. This line ‘NRCWO-3’ has been christened as ‘Bhima Safed’. It is suitable for cultivation in Chhatisgarh, Gujarat, Karnataka, Madhya Pradesh, Maharashtra, Orissa, Rajasthan, and Tamil Nadu. This is a medium maturing (110-120 days) variety having white, round to oval bulbs of mainly 70-80 g. It has 11-12% TSS and is thus suitable both for table and processing. Its average yield in multilocational trials in the recommended zones was 185 q/ha. It has less than 5% doubles and bolters.

Onion variety “Bhima Red” licensed

Onion variety “Bhima Red” has been licensed by Directorate of Onion and Garlic Research (DOGR) to M/s. Safalmantra Agro Farms Private Limited (SAFPL), Navi Mumbai.A Memorandum of Understanding in this regard was signed by the Directorate with SAFPL on 12/11/2014.SAFPL is all women lead organization, in the business of producing and marketing sustainable agro-products.As per MoU, DOGR has extended a non-exclusive license to SAFPL for seed production and distribution of Bhima Red.Bhima Red is a high yielding onion variety recommended for cultivation in kharif season in Punjab, Haryana, Delhi, Rajasthan, Gujarat, Maharashtra, Karnataka and Tamilnadu, in late kharif season in Gujarat, Karnataka and Maharashtra and for rabi in Madhya Pradesh and Maharashtra.It matures in 105-110 days after transplanting in kharif season and in 110-120 days after transplanting in late kharif and rabi seasons. The MoU will promote the cultivation of this variety by ensuring the better availability of quality seed to the farmers. 


 

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