दिसम्बर 2019 के महीने की सलाह

इस समय पछेती खरीफ प्याज तथा लहसुन की फसलें खेत में हैं और रबी मौसम की प्याज पौध की रोपाई करना है l प्याज के बीज की फसल भी कुछ किसानों के खेतों में है l इन स्थितियों मे निम्न सलाह का पालन किया जाना चाहिए

क: खड़ी पछेती खरीफ प्याज फसल हेतु

1. रोपाई के 40,60,70 दिन बाद पत्तों पर 5 ग्राम / लीटर की मात्रा में सूक्ष्म पोषक तत्वों के मिश्रण के छिड़काव की सिफारिश की जाती है l

2. रोग निरोध के लिए मेथोमील (0.8 ग्रा./लीटर) तथा मैन्कोजेब (2.5 ग्रा./लीटर ) के घोल को एक साथ मिलाकर छिड़काव करने की सिफारिश की जाती है l

3. पहले छिड़काव के पंद्रह दिन बाद यदि जरुरी हो तो कार्बोसल्फान ( 2 मिलीलीटर / लीटर ) तथा ट्राइकोजोल (1 ग्रा/लीटर ) को मिलाकर पुन: छिड़काव करें।

4. अगर फिर भी आवश्यकता हो तो हेक्साकोनाज़ोले ( 1 ग्राम/लीटर ) तथा प्रोफोनोफॉस (1 मिली / लीटर ) को जल में घोलकर दूसरे छिड़काव के पन्द्रह दिन बाद छिड़का जा सकता है।

5. जरूरत होने पर तीसरे छिड़काव के पन्द्रह दिन बाद हेक्साकोनाज़ोले (1 ग्राम/लीटर ) प्रोफकोनाजोल (1 ग्राम/लीटर ) को जल में घोलकर चौथा छिड़काव किया जा सकता है।

: रबी प्याज के रोपाई हेतु

1. रोपाई के लिए पौधे का चयन करते समय उचित ध्यान रखा जाना चाहिए। अधिक और कम उम्र के पौधो को नही लेना चाहिए।

2. 40-50 दिन पुराने पौध को 15-10 से.मी. ( पक्तियो के बीच 15 सेमी तथा पौधे से पौधे के बीच 10 सेमी) की दूरी पर रोपित किया जाना चाहिए।

3. कवक जनित रोगों को कम करने हेतु कारबेंडाजिम घोल (0.1) से उपचारित करने के बाद ही पौध को लगाना चाहिए।

4. यदि कीट पत्तों के रोग पौध में लगते हैं तो ‍मिथोमिल (0.8 ग्राम/लीटर) तथा मैनकोजेब (2.5 ग्राम/लीटर) को, पौध लगाने के 20 दिन बाद छिड़काव करना चाहिए।

5. अगर फिर भी आवश्यकता हो तो प्रोफेनोफॉस (1मिलीलीटर / लीटर) तथा हेक्साकोनाजोल ( 1 ग्राम/लीटर ) का छिड़काव पत्तो तथा कीट रोगो से पौध को बचाने हेतु दोबारा करना चाहिए।

6. रोपाई के तीस दिनों के बाद 35 किलो ग्राम/ हेक्टेयर नाइट्रोजन दिया जा सकता है।

7. हाथ से खरपतवार को निकालने का कार्य रोपाई के 40-60 दिनो के बाद करना चाहिए।

खेत में खडी लहसुन फसल के लिए

1. रोपाई के 30,45 तथा 60 दिन के अन्तराल पर सूक्ष्म पोषक तत्वों का मिश्रण (5 ग्राम/लीटर) का घोल बनाकर पत्तों पर छिडकाव की सिफारिश की जाती है।

2. रोग निरोध के लिए कार्बोसल्फान (2 ‍मिलीलीटर/लीटर) तथा ट्रायसायक्लाजोल (1 ग्राम/लीटर) के घोल को एक साथ मिलाकर छिड़काव करने की सिफारिश की जाती है

3. पहले छिड़काव के पंद्रह दिन बाद यदि जरुरी हो तो मिथेमिल (1 ग्राम/लीटर) तथा मैनकोजेब (1 ग्राम/लीटर) को मिलाकर पुन: छिड़काव करें।

4. अगर फिर भी आवश्यकता हो तो प्रोफेनोफोस (1 ‍मिलीलीटर/लीटर) तथा हेक्साकोनाजोल (1 ग्राम/लीटर) को जल मे घोलकर दूसरे छिड़काव के पन्द्रह दिन बाद छिडका जा सकता है।

5. यदि तीन छिड़काव कर दिए गए हैं तो जरूरत होने पर तीसरे छिड़काव के पन्द्रह दिन बाद फिप्रोनिल (1 ‍मिलीलीटर/लीटर) तथा प्रोपिकोनाजोल (1ग्राम/लीटर) को जल में घोलकर चौथा छिड़काव किया जा सकता है।

6. रोपाई के 45 दिन के बाद 25 कि ग्रा/ हेक्टेयर की दर से नायट्रोजन के लगाने की सिफारिश की जाती है।

7. यदि लाल मकड़ी कीट द्वारा जनित लक्षण पौधे में दिखते हैं तो सल्फर (2 ग्राम/लीटर) अथवा डाइकोफोल (2 ‍मिली/लीटर) के छिड़काव का सिफारिश की जाती है।

खेत मे खड़ी प्याज के बीज फसल हेतु

1. रोपण के 40-60 दिनों के बाद हाथों से खरपतवारों को निकालना चाहिए।

2. रोग निरोध के लिए मिथोमिल (1 ग्राम/लीटर) तथा ट्रायसायक्लाजोल (1 ग्राम/लीटर) के घोल को एक साथ मिलाकर छिड़काव करने की सिफारिश की जाती है

3. पहले छिड़काव के पंद्रह दिन बाद यदि जरुरी हो तो प्रोफेनोफोस(1 ग्राम/लीटर) तथा मैनकोजेब (1 ग्राम/लीटर) को मिलाकर पुन: छिड़काव करें।

4. अगर फिर भी आवश्यकता हो तो कार्बोसल्फान(1 ‍मिलीलीटर/लीटर) तथा हेक्साकोनाजोल (1 ग्राम/लीटर) को जल मे घोलकर दूसरे छिडकाव के पन्द्रह दिन बाद छिडका जा सकता है।

5. यदि तीन छिड़काव कर दिए गए हैं, जरूरत होने पर तीसरे छिड़काव के पन्द्रह दिन बाद फिप्रोनिल (1 ‍मिलीलीटर/लीटर) तथा प्रोपिकोनाजोल (1ग्राम/लीटर) को जल में घोलकर चौथा छिड़काव किया जा सकता है।

6. रोपण के 45 दिन के बाद 30 कि ग्रा/ हेक्टेयर की दर से नायट्रोजन दिया जा सकता है।

7. रोपण के 80 दिन बाद व फूल आना शुरू होने के बाद कीटनाशक का उपयोग न करें। कीटनाशक के छिड़काव से परागण की क्रिया को नुकसान पहुच सकता है।

नोट कार्बोसल्फान, प्रोफेनोफास, फिथोमिल का प्रयोग थ्रिप्स / कीट द्वारा फसलों पर नुकसान के लक्षण दिखाई देने पर ही करें। मैनकोजब, हेक्साकोनाजोल, प्रोपिकोनाजोल, ट्राइसाइक्लोजोल को प्रयोग रोग को लक्षण दिखाई देने होने पर ही करें।