एप्रिल 2019 के महीने की सलाह

. निकासी के लिए तैयार रबी प्याज की फसल के लिए

1.  फसल की सिंचाई निकासी के 10-15 दिन पहले बंद की जानी चाहिए।

2.  लगभग 50 प्रतिशत प्याज में गर्दन गिरने पर प्याज निकालने चाहिए।

3.  तोर वाले कंद दिखाई देने पर ऐसे कंदों की निकासी तुरन्त करें।

4.  प्याज को उखाड़ने के बाद उन्हें पत्तियों समेत 3 दिन तक खेत में रखकर सुखाना चाहिए, जिससे कंद शुष्क होंगे और उनकी जीवनवधि बढ़ जाएगी।

5.  तीन दिन खेत में सुखाने के पश्चात 2 से 2.5 सें.मी. गर्दन छोडकर प्याज का ऊपरी हिस्सा काट देना चाहिए और 10-12 दिनों के लिए प्याज को छाया में रखना चाहिए, जिससे कि बेहतर भंडारण हो सके।

6.  प्याज को सतह एवं बाजू से हवादार भंडार गृह में भंडारित करना चाहिए।

   . लहसुन के भंडारण के लिए

1.  निकासी के तुरन्त बाद लहसुन का श्रेणीकरण किया जाना चाहिए और 20-25 पौधों को एक बंडल में सिरों के साथ बांध देना चाहिए

2.  शीर्ष को तीन खंडों में विभाजित किया जाए और आपस में मजबूती से बांध दिया जाए।

3.  ऐसे बंडलों को 15 दिनों के लिए सुखाने हेतु छाया में सीधी स्थिति में रखना चाहिए। उसके पश्चात उन्हें भंडारण गृह में भंडारित करना चाहिए

4.  लहसुन कंदों को पत्तों के साथ हवादार भंडारण गृह में लटकाकर अथवा ऊपर की ओर कम होते हुए गोलाकार ढ़ेर बनाकर भंडारित करना चाहिए।

   . निकासी के लिए तैयार बीज उत्पादन हेतु लगाई प्याज फसल के लिए

1.   पुष्पछत्र में बीज काले हो जाने पर पुष्पछत्र की कटाई करें।

2.   परिपक्वता के बाद तीन से चार बार पुष्पछत्रों की कटाई समय-समय पर करते रहना चाहिए।

3.   पुष्पछत्र  को खुली धूप में सुखाया जाना चाहिए बीज की गहाई रोलिंग या खलिहान मशीन द्वारा की जा सकती है।

 

4.   बीज को 6% से कम नमीं होने तक सुखाना चाहिए और साफ बीज को 400 गेज वाली पॉलिथीन की थैलियों में अच्छी तरह बंद कर रखना चाहिए।