भण्ड़ारण

लहसुन मुख्यत एक रबी फसल है जिसकी खुदाई मार्च महीने के दौरान की जाती है और खपत के लिए वर्शभर इसकी मांग बनी रहती है। अतः वर्षभर आपूर्ति करते रहने के लिए लहसुन के कंदों का भण्ड़ारण समुचित तरीके से किया जाना चाहिए। उचित तरीके से उपचारित (शुष्क ग्रीवा एवं बाह्य छिलका), स्वच्छ एवं स्पर्ष करने में मुलायम लगने वाले कंदों को 5-6 महीनों के लिए हवादार भण्ड़ार गृहों में अनुकूल तापमान और कम आपेक्षिक आर्द्रता (ढ 70 प्रतिषत) में भण्ड़ारित किया जा सकता है। भण्ड़ारण से पूर्व कंदों का श्रेणीकरण कर उन्हें 20-25 पौधों के एक बंडल में सिरों के साथ बांध देना चाहिए। शीर्ष को तीन खंड़ों में विभाजित किया जाए और आपस में मजबूती से बांध दिया जाए। ऐसे बंड़लों को 15 दिनों के लिए उपचार हेतु छाया में सीधी स्थिति में रखा जाता है और कंदों को सुखाने के लिए उन्हें सूखे तथा अच्छे हवादार क्षेत्र में लटका दिया जाता है अथवा कंदों को सुखाने के लिए तेज हवा का उपयोग किया जाता है। यदि बड़ी मात्रा में कंदों का भण्ड़ारण किया जाना हो तब इन्हें 4 फीट व्यास वाले वृत में 3 फीट की ऊंचाई पर व्यवस्थित करना चाहिए। कंदों की व्यवस्था करते समय ढे़र का व्यास नीचे 4 फीट एवं  ऊपर की ओर धीरे-धीरे कम करते हुए षीर्श पर 3 फीट होना चाहिए। कंदों के दो ढ़ेरों के बीच बेहतर वायु संचरण के लिए उचित फासला बनाए रखना चाहिए। भण्ड़ार गृहों में उच्च आर्द्रता से माउल्ड़ वृद्धि और सड़न को बढ़ावा मिलता है। माउल्ड़ वृद्धि एक समस्या का रूप धारण कर सकती है यदि भण्ड़ारण से पूर्व कंदों का समुचित उपचार नहीं किया गया हो। भण्ड़ारण के दौरान कंद अक्सर मुलायम, दलदले हो जाते हैं तथा मुरझा जाते है। सूर्य के प्रकाश की अधिकता से कंन्दो को बचाना चाहिए क्योंकि इसके कारण उत्पन्न अतिरिक्त सिकुड़न की वजह से इनमें विमोचन हो सकता है।

 दीर्घावधि भण्ड़ारण के लिए लहसुन को कम आपेक्षिक आर्द्रता (60-70 प्रतिशत) के साथ -10 सेल्सि. से 00 सेल्सि. के तापमान पर शीत भण्ड़ार गृहों में भण्ड़ारित करना चाहिए। लहसुन फसल में नाइट्रोजन का अधिक मात्रा में प्रयोग एवं खुदाई से 15-20 दिन पूर्व अधिक सिंचाई करने के फलस्वरूप खेत में कंदों में प्रस्फुटन होने की संभावना को बल मिलता है। लहसुन की अगेती रोपाई से भी प्रस्फुटन होता है। कंदों में होने वाले प्रस्फुटन की इस समस्या को रोकने के लिए लहसुन की फसल में नाइट्रोजन का उचित मात्रा में ही प्रयोग किया जाए और खुदाई से 15-20 दिन पहले सिंचाई करना बंद कर दें। भण्ड़ारण में प्रस्फुटन की रोकथाम के लिए कोबाल्ट-60 गामा किरणों के 2-6 krad तक के साथ विकिरण करने की सिफारिश की जाती है।  खुदाई के 8 सप्ताह के भीतर कंदों का विकिरण उपचार ( प्रस्फुटन प्रारंभ होने से पहले) करने से प्रस्फुटन को प्रभावी ढ़ंग से रोका जा सकता है, भार में होने वाली क्षति को कम किया जा सकता है और लगभग एक वर्श के लिए भण्ड़ारण काल को बढ़ाया जा सकता है।  10 krad तक  से अधिक विकरण करने से डायीइलायील डाइ-सल्फाइड़ जिससे लहसुन में एक विशिष्ट स्वाद मिलता है, की मात्रा कम होती है । लहसुन की खुदाई पूर्व 0.1 प्रतिशत कार्बेन्डाजिम का छिड़काव और भण्ड़ारण से पूर्व भण्ड़ार गृह को संक्रमण रहित करने से भण्ड़ार क्षति विशेषकर सड़न-गलन में कमी आती है। 

 

भण्ड़ारण में लहसुन कंद